नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन (131वां) विधेयक को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में हुए मतदान में यह बिल आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और 54 वोटों से खारिज हो गया। सदन में मौजूद 528 सांसदों में से 298 ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। हालांकि, इस तरह के संशोधन को पारित करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, जो सरकार जुटा नहीं पाई।
इस घटनाक्रम के बाद सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले दो अन्य अहम विधेयक—परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026—को फिलहाल टाल दिया गया है। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्य बिल के पारित न होने के कारण संबंधित विधेयकों पर आगे बढ़ना उचित नहीं समझा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया अब और जटिल हो गई है। संविधान संशोधन के बिना लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि और परिसीमन संभव नहीं होगा, जो इस नीति का आधार माना जा रहा था। इससे 2029 के आम चुनाव भी मौजूदा 543 सीटों पर ही होने की संभावना बढ़ गई है।
संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ऐसे संशोधन के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है, जबकि अनुच्छेद 108 के अनुसार इस तरह के मामलों में संयुक्त सत्र बुलाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में सरकार के पास अब विकल्प सीमित हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र सरकार आगामी सत्र में संशोधित प्रस्ताव के साथ फिर से प्रयास कर सकती है। इसके लिए विपक्ष के साथ सहमति बनाना और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना अहम होगा।