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युद्ध बॉन्ड बेचकर हथियारबंद होगा यूरोप, EU देशों के लिए बनेगा 162 अरब डॉलर का रक्षा फंड, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Thursday, March 6, 2025

मुंबई, 06 मार्च, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोप को फिर से हथियारबंद करने के लिए 842 अरब डॉलर जुटाने का प्रस्ताव दिया है। मंगलवार को पेश इस प्रस्ताव को 5 भाग में लागू किया जाएगा, जिसमें यूरोपीय यूनियन (EU) के सदस्य देशों को हथियारबंद करने के लिए 160 अरब डॉलर (150 अरब यूरो) का डिफेंस फंड बनाने प्रस्ताव है। इस डिफेंस फंड को जुटाने के लिए यूरोपीय यूनियन वॉर बॉन्ड जारी करेगा। EU इससे पहले भी यूक्रेन की मदद के लिए 54 अरब डॉलर (50 अरब यूरो) के बॉन्ड जारी कर चुका है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस प्रस्ताव के सामने आते ही ब्रिटिश डिफेंस कंपनी BAE सिस्टम्स, जर्मन हथियार निर्माता राइनमेटल और इटली की एयरोस्पेस और डिफेंस फर्म लियोनार्डो के शेयर्स में रिकॉर्ड उछाल आया।

ट्रम्प सरकार की तरफ से हाल के दिनों उठाए गए कदमों की वजह से यूरोप अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता कम करना चाहता है। ट्रम्प कई बार अमेरिका को नाटो से अलग करने की बात कह चुके हैं। व्हाइट हाउस में ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच बहस के बाद 3 मार्च को लंदन में यूरोपीय देशों की समिट उर्सुला वॉन डेर ने यूरोप को तत्काल हथियारबंद करने की जरूरत बताई थी। उन्होंने कहा था कि हमें डिफेंस निवेश बढ़ाना होगा। यह यूरोपीय यूनियन की सुरक्षा के लिए जरूरी है। हमें फिलहाल सबसे खराब हालात के लिए तैयार रहना चाहिए।

अमेरिका और USRR (वर्तमान रूस) के बीच कोल्ड वॉर (1947-91) के बाद से यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर यूरोप पर निर्भर रहा है। डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी के मुताबिक यूरोप के कई देश अपने डिफेंस पर GDP का 2% से कम खर्च कर रहे हैं। उनकी सेनाएं इतनी कमजोर हो गई हैं कि उन्हें उबरने में समय लगेगा। दूसरी तरफ ट्रम्प नाटो गठबंधन को समय और धन की बर्बादी समझते हैं। अगर अमेरिका नाटो छोड़ देता है तो यूरोपीय देशों अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए डिफेंस पर कम से कम 3% खर्च करना होगा। उन्हें गोला-बारूद, ट्रांसपोर्ट, ईंधन भरने वाले विमान, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, उपग्रह और ड्रोन की कमी को पाटना होगा, जो फिलहाल अमेरिका की तरफ से मुहैया कराए जाते हैं। यूके और फ्रांस जैसे नाटो सदस्य-देशों के पास 500 एटमी हथियार हैं, जबकि अकेले रूस के पास 6000 हैं। अगर अमेरिका नाटो से बाहर चला गया तो गठबंधन को अपनी न्यूक्लियर-पॉलिसी को नए सिरे से आकार देना होगा।


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