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कौन थे जापान के ‘लैला मजनूं’, जिनकी लव स्टोरी मिसाल, उनकी याद में आज मनाते हैं ‘वैलेंटाइन डे’

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Posted On:Monday, July 7, 2025

जब भी प्यार की बात होती है, तो दुनिया के कई देशों में इसे खास अंदाज में मनाया जाता है। भारत और कई देशों में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है, लेकिन जापान में प्यार का त्योहार थोड़ा अलग है। यहां प्रेम को समर्पित एक अनूठा पर्व है, जिसे तानाबाता फेस्टिवल या ‘सितारों का त्योहार’ कहा जाता है, जो हर साल 7 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन खास इसलिए है क्योंकि यह दो प्रेमियों के मिलने का प्रतीक है, जिन्हें केवल साल में एक बार मिल पाने का मौका मिलता है। आइए जानते हैं इस खूबसूरत त्योहार की कहानी, परंपराएं और जापान में इसे मनाने का तरीका।


तानाबाता फेस्टिवल कब मनाया जाता है?

तानाबाता का अर्थ है ‘सितारों का त्योहार’। यह पर्व जापानी कैलेंडर के अनुसार 7वें चंद्र महीने की 7वीं तारीख को मनाया जाता है। हालांकि आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसे 7 जुलाई को मनाना प्रचलित है। कुछ जगह इसे 7 अगस्त को भी मनाते हैं। तानाबाता का आधार एक चीनी कथा है जो जापान में 8वीं सदी में पहुंची। यह प्रेम कहानी दो सितारों — वेगा (ओरिहिमे) और अल्टेयर (हिकोबोशी) — के बीच के प्यार पर आधारित है।


क्या है तानाबाता की प्रेम कहानी?

कथा के अनुसार, ओरिहिमे एक राजकुमारी थी जो स्वर्गीय नदी के किनारे सुंदर कपड़े बुनती थी। उसका नाम ‘ओरिहिमे’ था, जिसका अर्थ ‘ताने वाली राजकुमारी’ होता है। उसे बुनाई करना बहुत पसंद था, लेकिन वह अपनी जिंदगी में प्यार की कमी महसूस करती थी। उसके पिता, जो स्वर्ग के देवता थे, उसकी शादी के लिए सोच-विचार कर रहे थे।

उनके पिता ने उसे हिकोबोशी से मिलवाया, जो एक साधारण चरवाहा था और मिल्की वे (आकाशगंगा) के दूसरी ओर रहता था। दोनों को मिलते ही गहरा प्यार हो गया और उन्होंने शादी कर ली। लेकिन उनके प्यार में इतनी लगन थी कि ओरिहिमे ने बुनाई करना छोड़ दिया और हिकोबोशी ने अपने काम को नज़रअंदाज़ कर दिया। यह बात देवता पिता को रास नहीं आई और उन्होंने उन्हें अलग कर दिया, दोनों को आकाशगंगा के दो अलग-अलग किनारों पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

परंतु यह भी तय किया गया कि वे दोनों साल में सिर्फ एक दिन, यानी 7 जुलाई को मिल सकते हैं। यही दिन जापान में तानाबाता फेस्टिवल के रूप में मनाया जाता है, जब ये दो प्रेमी सितारे मिलते हैं।


बारिश का महत्व

जापान में तानाबाता के दिन बारिश होना शुभ माना जाता है क्योंकि कहा जाता है कि अगर बारिश होती है तो दोनों सितारों के मिलने में कोई बाधा नहीं आती। अगर मौसम साफ रहता है, तो मिलन रुक जाता है और दोनों को एक साल और इंतजार करना पड़ता है। इसलिए लोग इस दिन बारिश की कामना करते हैं।


तानाबाता कैसे मनाते हैं?

कागज की पट्टियां और इच्छाएं: इस दिन लोग रंग-बिरंगे कागज पर अपनी मनोकामनाएं लिखते हैं और उन्हें बांस की टहनियों पर लटकाते हैं। ये टहनी नदियों में बहा दी जाती है। कागज से सुंदर सजावट, जैसे सितारे, पक्षी और नाव भी बनायी जाती हैं।

सजावट और रोशनी: मंदिरों, खासकर जोजोजी मंदिर में लालटेन और कागज की सजावट की जाती है ताकि वे आकाश में चमकते तारों की तरह दिखें। यह त्योहार शाम को मनाया जाता है, इसलिए रोशनी का खास महत्व होता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम: कई जगहों पर झांकियां, नृत्य और संगीत के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो त्योहार को और जीवंत बनाते हैं। बच्चों और युवाओं में भी यह पर्व खासा लोकप्रिय है।


क्यों खास है तानाबाता?

तानाबाता सिर्फ एक प्रेम पर्व नहीं है, बल्कि यह एक संदेश भी देता है कि प्यार में समर्पण के साथ-साथ जिम्मेदारियां भी निभानी चाहिए। ओरिहिमे और हिकोबोशी की कहानी हमें बताती है कि प्रेम में भी अपने कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए। यह त्योहार जापानी संस्कृति में प्रेम, समर्पण और उम्मीद की भावना का प्रतीक है।


निष्कर्ष

तानाबाता फेस्टिवल जापान की एक अनोखी प्रेम कहानी और सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है। यह त्योहार प्रेमियों को साल में एक बार मिलने का अवसर देता है और एक खास तरह से प्यार का जश्न मनाने का तरीका सिखाता है। इसके साथ ही यह हमें जीवन में संतुलन बनाए रखने, अपने कर्तव्यों का पालन करने और उम्मीद के साथ आगे बढ़ने का भी संदेश देता है। इसलिए, अगर आप कभी जापान जाएं तो 7 जुलाई को इस खूबसूरत और दिल को छू लेने वाले ‘सितारों के त्योहार’ का अनुभव जरूर करें


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