ताजा खबर
राम गोपाल वर्मा ने ‘धुरंधर 2’ को बताया गेम-चेंजर, कहा – “गॉडफादर का भी गॉडफादर”   ||    कांग्रेस की रैली में 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' की गूंज, मणिशंकर अय्यर मूवमेंट की यादें हुईं ताजा   ||    मुझे दलील रखने दें... सॉलिसिटर जनरल देते रहे दलील, CJI सूर्यकांत बोले- हम अंतरिम जमानत देते हैं, सिब...   ||    AUS vs ENG: भारत के खिलाफ फेंकी थी 1 ओवर में 9 गेंद, लगाई थी वाइड की लाइन, उसके दम पर एडिलेड टेस्ट ज...   ||    On This Day in 1979: जब पिच पर एल्युमीनियम बैट ने बंद करा दिया टेस्ट मैच, बदलने पड़ गए क्रिकेट के नि...   ||    BCCI का भारतीय टीम के लिए नया फरमान, प्लेयर्स को अल्टीमेटम! किसी भी कीमत पर खेलने होंगे ये 2 मैच   ||    इंग्लैंड ने चली चाल, एशेज में वापसी करने के लिए प्लेइंग XI में बड़ा बदलाव, जोश टंग की एंट्री   ||    चाहे जितना फ्लॉप हो टी20 टीम में इन 2 खिलाड़ियों की जगह है पक्की, आखिर क्यों प्लेइंग XI से बाहर नहीं...   ||    आज से अमेरिका लेगा भारतीयों के खिलाफ एक्शन? H-1B और H-4 वीजा के लिए छोड़नी पड़ेगी प्राइवेसी   ||    'मेरा बेटा बहुत...', सिडनी में हमला करने वाले आतंकी की मां का आया बयान, गोलीबारी पर जानें क्या कहा   ||   

टैरिफ के बाद डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कहा- इस पर टैक्स लगाया जाना चाहिए, जानें क्या है पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Wednesday, April 16, 2025

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से चर्चा में आकर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को निशाने पर लिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी 'राजनीतिक, वैचारिक और आतंकवाद से प्रेरित नफरत' को बढ़ावा देना जारी रखती है, तो उसकी कर-मुक्त (Tax-Exempt) स्थिति खत्म की जा सकती है।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब हार्वर्ड ने ट्रंप प्रशासन की कुछ मांगों को गैरकानूनी बताते हुए खारिज कर दिया

क्या कहा ट्रंप ने?

मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को दी गई टैक्स छूट की समीक्षा की जा सकती है। ट्रंप का तर्क था कि अगर कोई संस्था राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा देती है, तो उसे सार्वजनिक हित की संस्था नहीं माना जा सकता और उसे आम संस्थानों की तरह टैक्स देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स छूट सिर्फ उन्हें दी जानी चाहिए जो वास्तव में सार्वजनिक हित में कार्य कर रहे हों – जैसे शिक्षा, धर्म या समाजसेवा के क्षेत्र में।

क्या है मामला?

दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने 3 अप्रैल को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को एक चिट्ठी भेजी थी जिसमें कई मांगें रखी गई थीं, जैसे:

  • विश्वविद्यालय में डाइवर्सिटी विचारों का ऑडिट करना

  • कुछ छात्र समूहों को मान्यता देना बंद करना

  • विश्वविद्यालय के एडमिशन और हायरिंग प्रोसेस पर सरकारी नियंत्रण

  • डाइवर्सिटी ऑफिस बंद करना

  • अंतरराष्ट्रीय छात्रों की इमिग्रेशन जांच में सहायता करना

हार्वर्ड ने इन मांगों को असंवैधानिक और अनुचित हस्तक्षेप बताते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया।

हार्वर्ड की प्रतिक्रिया

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट एलन गार्बर ने छात्रों और फैकल्टी को एक ओपन लेटर लिखकर कहा कि यूनिवर्सिटी अपनी स्वतंत्रता और मूल्यों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकार यह तय नहीं कर सकती कि विश्वविद्यालय क्या पढ़ाए, किसे भर्ती करे और कौन से मुद्दों पर शोध करे।

गार्बर ने लिखा –

"हमारा संविधान हमें विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, और हम इसे बनाए रखेंगे।"

फंडिंग पर रोक

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की $2.2 अरब डॉलर (करीब 18,000 करोड़ रुपये) की फंडिंग रोक दी है। यह फंडिंग मल्टी-ईयर ग्रांट्स और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के रूप में दी जाती थी। इसके अलावा $60 मिलियन (करीब 500 करोड़ रुपये) की तत्काल फंडिंग भी रोक दी गई है।

ट्रंप की जॉइंट टास्क फोर्स टु कॉम्बैट एंटी-सेमिटिज्म का कहना है कि हार्वर्ड जैसे संस्थान सरकारी पैसा तो चाहते हैं, लेकिन कानूनों का पालन करने में हिचकते हैं।

गाजा युद्ध और विरोध प्रदर्शन की भूमिका

इस पूरे मामले की जड़ गाजा युद्ध से जुड़ी है। अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज़ में इज़राइल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए, जिनमें से कुछ हिंसक भी हुए। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन विरोधों के जरिए कट्टरता और नफरत को बढ़ावा दिया गया।

इसी वजह से इससे पहले कोलंबिया यूनिवर्सिटी को भी ट्रंप प्रशासन ने निशाने पर लिया था, लेकिन कोलंबिया ने कुछ मांगें स्वीकार कर ली थीं, जबकि हार्वर्ड ने पूरी तरह से इनकार कर दिया।

निष्कर्ष

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और ट्रंप प्रशासन के बीच यह टकराव शिक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी और सरकारी नियंत्रण के मुद्दों पर गहराता जा रहा है। जहां एक ओर हार्वर्ड अपने स्वतंत्र और निष्पक्ष शैक्षणिक माहौल की रक्षा के लिए खड़ा है, वहीं ट्रंप प्रशासन राजनीतिक और वैचारिक तटस्थता के नाम पर उस पर दबाव बना रहा है।

अब देखना होगा कि आने वाले समय में यह मामला न्यायालय या सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनता है या कोई समाधान निकलता है। फिलहाल, यह विवाद अमेरिकी शिक्षा और राजनीति के टकराव का प्रतीक बन गया है।


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.