पुणे न्यूज डेस्क: पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) का महत्वाकांक्षी 83 किलोमीटर लंबा इनर रिंग रोड प्रोजेक्ट फिलहाल मंजूरी के इंतज़ार में अटका हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि रक्षा विभाग, वन विभाग और पुणे कलेक्टर कार्यालय से जमीन अधिग्रहण की अनुमति नहीं मिलने के कारण टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह रिंग रोड सोलू से वाडगांव शिंदे तक बनाई जानी है और इसे महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) की आउटर रिंग रोड के समानांतर तैयार किया जाएगा।
PMRDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी आवश्यक मंजूरियां मिलते ही टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट का मकसद शहर के ट्रैफिक बोझ को कम करना और भारी वाहनों को शहर की सीमाओं से बाहर डायवर्ट करना है। इसे चार चरणों में पूरा किया जाएगा, जिससे पुणे और आसपास के तालुकों में जाम की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण हो सकेगा।
पहले चरण के लिए लगभग 28 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जिसमें सोलू, निरुगुडी और वाडगांव शिंदे गांव शामिल हैं। PMRDA ने जमीन के मुआवजे के लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) जैसे विकल्पों पर किसानों से बातचीत शुरू की है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला कलेक्टर के साथ समन्वय बढ़ाएं और किसानों से जल्द समझौता करें।
यह इनर रिंग रोड खेड़, हवेली, मुलशी और मावल तालुकों के 44 गांवों से होकर गुज़रेगी, और इसका शुरुआती 5 किलोमीटर का हिस्सा नागर रोड पर ट्रैफिक कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। हालांकि, कई सरकारी विभागों की स्वीकृति प्रक्रिया धीमी होने से यह प्रोजेक्ट अटक गया है। PMRDA का कहना है कि मंजूरी प्रक्रिया को तेज़ करने की कोशिशें जारी हैं ताकि यह परियोजना जल्द शुरू हो सके, क्योंकि यह पुणे के भविष्य के विकास के लिए बेहद जरूरी है।