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महाराष्ट्र में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का पहला मराठी साहित्य सम्मेलन, 20 से 22 दिसंबर तक पुणे में

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Posted On:Tuesday, December 17, 2024


पुणे न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का पहला मराठी साहित्य सम्मेलन 20 से 22 दिसंबर तक पुणे में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में लगभग 2,000 से 2,500 साहित्य प्रेमियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में यशदा के अतिरिक्त महासंचालक शेखर गायकवाड़ होंगे, जबकि पुणे मनपा आयुक्त डॉ. राजेंद्र भोसले स्वागताध्यक्ष के रूप में अपनी उपस्थिति देंगे। सम्मेलन का आयोजन संवाद पुणे संस्था के सुनील महाजन द्वारा किया जा रहा है।

महाराष्ट्र में करीब 18 लाख अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कई लेखक और कवि भी हैं। इनकी साहित्य में गहरी रुचि है और कुछ को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिल चुके हैं। हाल ही में मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा भी प्राप्त हुआ है। इस सम्मेलन का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों की साहित्यिक भागीदारी को बढ़ावा देना और मराठी भाषा के विकास तथा संवर्धन में उनके योगदान को प्रोत्साहित करना है।

सम्मेलन की समन्वय समिति में उपायुक्त राजीव नंदकर, उपायुक्त आशा राउत और शिक्षा अधिकारी आशा उबाले शामिल हैं। यह तीन दिवसीय सम्मेलन बालगंधर्व रंगमंदिर में आयोजित किया जाएगा। पहले दिन, 20 दिसंबर को पुस्तक प्रदर्शनी, पुस्तक प्रकाशन, चित्र और छायाचित्र प्रदर्शन का उद्घाटन होगा। इस उद्घाटन समारोह में यशदा के महासंचालक निरंजन सुधांशु, सहकार आयुक्त दीपक तावरे और मनपा के अतिरिक्त आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी. भी उपस्थित रहेंगे।

शनिवार, 21 दिसंबर को पूर्व मुख्य सचिव डॉ. नितिन करीर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर अविनाश धर्माधिकारी, विभागीय आयुक्त चंद्रकांत पुलकुंडवार, जिलाधिकारी डॉ. सुहास दिवसे, साहित्य-संस्कृति मंडल के अध्यक्ष डॉ. सदानंद मोरे और अन्य प्रमुख हस्तियां भी मौजूद होंगी। उद्घाटन के बाद अधिकारियों के लिए साहित्य लेखन की चुनौतियों, विभिन्न राज्यों की प्रशासनिक कार्य संस्कृति और अनुभव, और प्रशासन में साहित्य सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन का समापन बहुभाषी काव्य सम्मेलन से होगा, जिसमें विभिन्न भाषाओं के कवि और साहित्यकार अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। इस सम्मेलन के आयोजन से अधिकारियों और कर्मचारियों में साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और मराठी भाषा को एक नई दिशा मिलेगी।


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