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दुख और उत्सव का अनोखा संगम: ताइवान के अंतिम संस्कार में पोल डांस का सांस्कृतिक पहलू

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Posted On:Tuesday, September 9, 2025

मुंबई, 9 सितम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) मातम और शोक के माहौल में, जहां हर तरफ खामोशी और उदासी छाई होती है, क्या आप सोच सकते हैं कि वहां संगीत की धुन पर जोरदार नाच-गाना हो? ताइवान में अंतिम संस्कार के जुलूसों में ऐसा ही एक चौंकाने वाला और विरोधाभासी दृश्य देखने को मिलता है, जहां ‘फ्यूनरल स्ट्रिपर्स’ यानी अंतिम संस्कार में नाचने वाली कलाकारें प्रदर्शन करती हैं। यह परंपरा, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में अजीब माना जाता है, ताइवान में एक गहरी सांस्कृतिक जड़ें जमा चुकी है, जिसका इतिहास दशकों पुराना है।

यह अनोखी प्रथा 1980 के दशक में सामने आई, जब ताइवान के स्थानीय माफिया समूहों ने अंतिम संस्कार सेवाओं में अपना दबदबा बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने अपने ही नाइट क्लबों की डांसर्स को अंतिम संस्कार के जुलूसों में नाचने के लिए कम दरों पर पेश करना शुरू कर दिया। इस व्यावसायिक कदम के पीछे सिर्फ कमाई का मकसद नहीं था, बल्कि यह शक्ति और रुतबे का भी प्रदर्शन था। जितना भव्य और भीड़-भाड़ वाला अंतिम संस्कार होता था, परिवार को उतना ही सम्मानित और प्रभावशाली माना जाता था। इन डांसर्स के प्रदर्शन ने न केवल भीड़ खींची, बल्कि इसे एक तरह का 'स्टेटस सिंबल' बना दिया।

सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं

इस प्रथा के पीछे कुछ गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं भी हैं। ताइवानी लोक धर्म में यह माना जाता है कि मृत आत्माएं और अन्य देवता भी मनोरंजन पसंद करते हैं। इसलिए, एक जोरदार और जीवंत विदाई उन्हें खुश करती है और उनकी शांतिपूर्ण यात्रा सुनिश्चित करती है। "रेनाओ" (renao) नामक एक चीनी अवधारणा, जिसका अर्थ है 'शोर-शराबे वाला और जीवंत माहौल', इस प्रथा का आधार है। यह माना जाता है कि अंतिम संस्कार में जितना अधिक रेनाओ होगा, मृत व्यक्ति की आत्मा उतनी ही संतुष्ट होगी।

ये कलाकार अक्सर "इलेक्ट्रिक फ्लावर कार" (Electric Flower Car) नामक चलती-फिरती स्टेज पर प्रदर्शन करती हैं। ये ट्रक रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजे होते हैं, जिन पर डांसर पोल डांस करती हैं। हाल ही में, एक स्थानीय राजनेता तुंग ह्सियांग के अंतिम संस्कार में 50 पोल डांसर्स ने प्रदर्शन किया, जिसने दुनिया भर का ध्यान खींचा। उनके बेटे ने बताया कि उनके पिता ने खुद अपने अंतिम संस्कार को 'मज़ेदार और भव्य' बनाने की इच्छा जताई थी।

हालांकि, यह प्रथा विवादास्पद रही है और सरकार द्वारा इस पर रोक लगाने के प्रयास भी किए गए हैं, लेकिन यह ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक समुदायों में आज भी जारी है। यह ताइवान की एक अनूठी पहचान बन गई है, जो जीवन, मृत्यु, धर्म और मनोरंजन के बीच के जटिल संबंधों को दर्शाती है। यह दिखाता है कि कैसे एक प्राचीन परंपरा और आधुनिक व्यावसायिक हित मिलकर एक बिल्कुल नया और अप्रत्याशित सांस्कृतिक रूप ले सकते हैं।


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