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सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कानून पर केंद्र से मांगा जवाब, 26 नवंबर को होगी अगली सुनवाई, जानिए पूरा मामला

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Posted On:Tuesday, November 4, 2025

मुंबई, 04 नवम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से सभी याचिकाओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई की तारीख 26 नवंबर तय की। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अपने जवाब की प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को पहले से उपलब्ध कराएं, ताकि वे भी जल्द से जल्द अपने जवाब दाखिल कर सकें।

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक शतरंज खिलाड़ी की याचिका पर भी विचार किया और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि ई-स्पोर्ट्स गेम्स की आड़ में चल रहे ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह मांग की गई है कि देशभर में ऐसे सभी प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।

गौरतलब है कि 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025' के तहत देश में रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया गया है। यह बिल 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह अब कानून का रूप ले चुका है।

इससे पहले 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की उस याचिका को मंजूरी दी थी, जिसमें इस कानून को चुनौती देने वाली तीनों हाईकोर्ट की याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। अदालत का मानना था कि अलग-अलग अदालतों से अलग फैसले आने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

इस बीच, कोर्ट ने सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज (CASC) और शौर्य तिवारी की याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें यह कहा गया था कि सोशल और ई-स्पोर्ट्स गेम्स की आड़ में देशभर में बड़े पैमाने पर जुआ और सट्टेबाजी हो रही है, जिससे सामाजिक और आर्थिक नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता एडवोकेट विराग गुप्ता ने केंद्र को 2,000 ऐसे ऐप्स की सूची सौंपी और कहा कि यह मामला देश के 15 करोड़ बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है।

विराग गुप्ता ने कोर्ट में ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025’ का हवाला देते हुए बताया कि यह कानून भी इसी दिशा में बनाया गया है। बेंच ने सरकार को याचिकाकर्ता द्वारा दी गई ऐप्स की जानकारी पर जल्द कार्रवाई करने को कहा।

इस कानून को अब तक तीन हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में क्लबबूम 11 स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट, कर्नाटक हाईकोर्ट में हेड डिजिटल वर्क्स और दिल्ली हाईकोर्ट में बघीरा कैरम ने अपनी-अपनी याचिकाएं दायर की हैं। ये सभी कंपनियां ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स, रम्मी और कैरम जैसे गेमिंग प्लेटफॉर्म संचालित करती हैं।


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