ताजा खबर
कांग्रेस की रैली में 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' की गूंज, मणिशंकर अय्यर मूवमेंट की यादें हुईं ताजा   ||    मुझे दलील रखने दें... सॉलिसिटर जनरल देते रहे दलील, CJI सूर्यकांत बोले- हम अंतरिम जमानत देते हैं, सिब...   ||    AUS vs ENG: भारत के खिलाफ फेंकी थी 1 ओवर में 9 गेंद, लगाई थी वाइड की लाइन, उसके दम पर एडिलेड टेस्ट ज...   ||    On This Day in 1979: जब पिच पर एल्युमीनियम बैट ने बंद करा दिया टेस्ट मैच, बदलने पड़ गए क्रिकेट के नि...   ||    BCCI का भारतीय टीम के लिए नया फरमान, प्लेयर्स को अल्टीमेटम! किसी भी कीमत पर खेलने होंगे ये 2 मैच   ||    इंग्लैंड ने चली चाल, एशेज में वापसी करने के लिए प्लेइंग XI में बड़ा बदलाव, जोश टंग की एंट्री   ||    चाहे जितना फ्लॉप हो टी20 टीम में इन 2 खिलाड़ियों की जगह है पक्की, आखिर क्यों प्लेइंग XI से बाहर नहीं...   ||    आज से अमेरिका लेगा भारतीयों के खिलाफ एक्शन? H-1B और H-4 वीजा के लिए छोड़नी पड़ेगी प्राइवेसी   ||    'मेरा बेटा बहुत...', सिडनी में हमला करने वाले आतंकी की मां का आया बयान, गोलीबारी पर जानें क्या कहा   ||    ब्रिटेन से निकाले जाएंगे लाखों मुसलमान! भारत पर सबसे ज्यादा असर कैसे?   ||   

हाईकोर्ट ने कहा, मां-बाप की जगह कोई नहीं ले सकता, जानिए पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Monday, September 4, 2023

मुंबई, 4 सितम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में पिता को बेटे से मिलने की अनुमति देते हुए कमेंट किया, कि पहली पत्नी की मौत के बाद शख्स अगर दूसरी शादी करता है तो भी उसे पहली पत्नी से हुए बच्चे से अलग नहीं किया जा सकता। यहां तक की मां बाप आर्थिक संकट से भी जूझ रहे हों, उस स्थिति में भी बच्चे के पेरेंट्स की जगह कोई नहीं ले सकता। मामले पर जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल शर्मा की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने कहा कि पिता के खिलाफ एक क्रिमिनल केस के अलावा ऐसा कुछ नहीं है, जो उसे बच्चे की कस्टडी के लिए अयोग्य बनाए। याचिका में तर्क दिया गया है कि शख्स ने दूसरी शादी कर ली है, जिससे उसे एक बच्चा है। इसीलिए उसे पहली पत्नी से हुए बच्चे की कस्टडी नहीं दी जा सकती।

बेंच ने आगे कहा कि हमने चैंबर में बच्चे (जो अब करीब 15 साल का है) से बात की तो उसने यह बात स्वीकार की कि उसे अपने पिता की याद आती है। बच्चा डेढ़ साल की उम्र से नाना-नानी के साथ रहा है, इसीलिए उसके मन में नाना-नानी के लिए ज्यादा लगाव है। इस सब के बावजूद कोई भी बच्चे के मां-बाप की जगह नहीं ले सकता। यहां तक की मां-बाप आर्थिक संकट से भी जूझ रहे हैं, उस स्थिति में भी बच्चे की कस्टडी किसी और को नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने बच्चे के नाना-नानी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि फैमिली कोर्ट ने पिता को बच्चे की कस्टडी नहीं दी। पिता एक साल तक अपने बच्चे से मुलाकात कर सकेगा। इसके बाद पिता बच्चे से मिलने या उसकी कस्टडी मांगने के लिए कोर्ट में अपील कर सकता है।

आपको बता दे, मामला साल 2010 का है, बच्चे की मां की मौत हो गई थी। महिला के परिजन ने दामाद के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया। शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया। 2 साल जेल में बिताने के बाद 2012 में कोर्ट ने उसे बरी कर दिया था। इस फैसले को ससुराल के लोगों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है, अपील अभी लंबित है। मां की मौत के समय दोनों का डेढ़ साल का एक बच्चा था। जो पिता के जेल जाने के बाद से अपने नाना-नानी के साथ रह रहा था। अब नाना-नानी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बच्चे की स्थायी कस्टडी मांगी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.