ताजा खबर
कांग्रेस की रैली में 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' की गूंज, मणिशंकर अय्यर मूवमेंट की यादें हुईं ताजा   ||    मुझे दलील रखने दें... सॉलिसिटर जनरल देते रहे दलील, CJI सूर्यकांत बोले- हम अंतरिम जमानत देते हैं, सिब...   ||    AUS vs ENG: भारत के खिलाफ फेंकी थी 1 ओवर में 9 गेंद, लगाई थी वाइड की लाइन, उसके दम पर एडिलेड टेस्ट ज...   ||    On This Day in 1979: जब पिच पर एल्युमीनियम बैट ने बंद करा दिया टेस्ट मैच, बदलने पड़ गए क्रिकेट के नि...   ||    BCCI का भारतीय टीम के लिए नया फरमान, प्लेयर्स को अल्टीमेटम! किसी भी कीमत पर खेलने होंगे ये 2 मैच   ||    इंग्लैंड ने चली चाल, एशेज में वापसी करने के लिए प्लेइंग XI में बड़ा बदलाव, जोश टंग की एंट्री   ||    चाहे जितना फ्लॉप हो टी20 टीम में इन 2 खिलाड़ियों की जगह है पक्की, आखिर क्यों प्लेइंग XI से बाहर नहीं...   ||    आज से अमेरिका लेगा भारतीयों के खिलाफ एक्शन? H-1B और H-4 वीजा के लिए छोड़नी पड़ेगी प्राइवेसी   ||    'मेरा बेटा बहुत...', सिडनी में हमला करने वाले आतंकी की मां का आया बयान, गोलीबारी पर जानें क्या कहा   ||    ब्रिटेन से निकाले जाएंगे लाखों मुसलमान! भारत पर सबसे ज्यादा असर कैसे?   ||   

साल का सबसे बड़ा सुपरमून, आसमान में दिखा 14 गुना बड़ा और 30% ज्यादा चमकीला चांद, जानिए पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Wednesday, November 5, 2025

मुंबई, 05 नवम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। बुधवार की रात दुनिया भर में आसमान का नजारा बेहद खूबसूरत रहा। साल का सबसे बड़ा चांद यानी सुपरमून दिखाई दिया, जिसने लोगों को अपनी चमक से मंत्रमुग्ध कर दिया। यह साल का दूसरा सुपरमून था, जो सामान्य पूर्णिमा की तुलना में करीब 14 गुना बड़ा और लगभग 30% ज्यादा चमकीला नजर आया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे करीब होता है, तब यह आकार में बड़ा और ज्यादा चमकदार दिखाई देता है। इसी खगोलीय घटना को सुपरमून कहा जाता है। 5 नवंबर की रात चांद पृथ्वी से करीब 3,57,000 किलोमीटर की दूरी पर था, जो सामान्य दूरी से लगभग 27,000 किलोमीटर कम है। आम तौर पर चांद पृथ्वी से सबसे दूर 4,05,000 किलोमीटर और सबसे करीब 3,63,104 किलोमीटर पर रहता है।

सुपरमून के दौरान चंद्रमा धरती का चक्कर लगाते हुए अपनी कक्षा के नजदीकी बिंदु पर पहुंच जाता है, जिसे ‘पेरिजी’ कहा जाता है। वहीं, जब चांद सबसे दूर होता है, उस स्थिति को ‘अपोजी’ कहा जाता है। इस घटना का वैज्ञानिक नाम भले ही जटिल लगे, लेकिन इसका दृश्य बेहद मनमोहक होता है। ‘सुपरमून’ शब्द का इस्तेमाल पहली बार 1979 में एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोल ने किया था। चांद हर 27 दिन में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करता है और हर 29.5 दिन में एक बार पूर्णिमा आती है। हालांकि हर पूर्णिमा सुपरमून नहीं होती, लेकिन हर सुपरमून पूर्णिमा की रात ही दिखाई देता है। चांद की कक्षा अंडाकार होती है, इसलिए उसकी पृथ्वी से दूरी हर दिन बदलती रहती है।

जुलाई के महीने में दिखने वाले सुपरमून को ‘बक मून’ कहा जाता है। ‘बक’ शब्द का अर्थ होता है वयस्क नर हिरण। इसे यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इस समय हिरणों के नए सींग उगते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर इसे ‘थंडर मून’ भी कहा जाता है, क्योंकि जुलाई में अक्सर गरज और बिजली चमकने की घटनाएं अधिक होती हैं। आसमान में नजर आया यह सुपरमून न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी एक दुर्लभ और अद्भुत अनुभव रहा, जिसने धरती के हर कोने में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.