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पहेली बना ताकतवर फाइटर जेट F-35B, UK नेवी की टीम भी नहीं कर पाई ठीक

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Posted On:Saturday, June 21, 2025

हाल ही में यूके नेवी के फाइटर जेट F-35B को भारत के केरल स्थित तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। इस लैंडिंग की वजह जेट में ईंधन की कमी बताई गई। लेकिन अब यह मामला महज एक तकनीकी घटना न रहकर एक सुरक्षा और तकनीकी जांच का विषय बन गया है। इस लड़ाकू विमान की गहराती समस्याओं ने कई सैन्य विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों को चिंता में डाल दिया है।


फ्यूल की कमी से हुई थी इमरजेंसी लैंडिंग

F-35B, जो कि पांचवीं पीढ़ी का एक अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान है, हाल ही में HMS प्रिंस ऑफ वेल्स के साथ एक संयुक्त समुद्री अभ्यास के लिए अरब सागर में तैनात था। यह विमान अभ्यास के बाद अपने कैरियर पर लौट रहा था, लेकिन खराब मौसम के कारण वह जहाज पर लैंड नहीं कर सका। इसी बीच विमान का फ्यूल तेजी से खत्म होने लगा और अंततः उसे भारत के तट के सबसे नजदीकी एयरपोर्ट, तिरुवनंतपुरम में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।

भारतीय वायुसेना और एटीसी ने तत्परता दिखाते हुए विमान को सुरक्षित लैंड कराया और तुरंत आवश्यक फ्यूल और तकनीकी सहायता मुहैया कराई।


हाइड्रोलिक खराबी बन गई नई चुनौती

जहां लैंडिंग के बाद लगा कि विमान जल्द ही उड़ान भर लेगा, वहीं अब इसमें हाइड्रोलिक सिस्टम की तकनीकी खराबी सामने आई है। इस समस्या के कारण विमान को उड़ान की अनुमति नहीं मिल रही है। पहले यूके की एक तकनीकी टीम ने प्रयास किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। अब उम्मीद की जा रही है कि रॉयल नेवी की एक बड़ी मेंटेनेंस टीम विमान को सुधारने के लिए भारत भेजी जाएगी।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समस्या नहीं सुलझी तो विमान को मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए वापस ब्रिटेन ले जाया जा सकता है।


दुनिया का सबसे आधुनिक विमान बना ‘तकनीकी पहेली’

F-35B को दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर जेट्स में गिना जाता है। यह विमान वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग, स्टील्थ तकनीक, और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली से लैस है। लेकिन जिस तरह की समस्याएं इसमें बार-बार आ रही हैं, उसने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। 1983 में रॉयल नेवी का एक विमान फ्यूल खत्म होने के कारण एक स्पेनिश कार्गो शिप पर गिर गया था। वहीं कुछ साल पहले एक F-35B उड़ान भरने के तुरंत बाद समुद्र में गिर गया था क्योंकि उसके इंजन कवर को ठीक से हटाया नहीं गया था। ऐसे हादसे इस तकनीकी चमत्कार की कमियों की ओर इशारा करते हैं


भारत की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था

भारत की ओर से इस विमान को बेहद उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान की जा रही है। CISF ने विमान को एयरपोर्ट के बे नंबर-4 पर सुरक्षित खड़ा कर दिया है। साथ ही, पायलट फ्रेडी और तीन ब्रिटिश तकनीशियन भी विमान के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद हैं।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह एक संवेदनशील मामला बन चुका है क्योंकि किसी विदेशी फाइटर जेट का इस तरह भारत में रुक जाना सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम है।


आगे क्या?

अब निगाहें रॉयल नेवी की उस मेंटेनेंस टीम पर टिकी हैं, जो विमान को उड़ान के योग्य बना सके। यदि ऐसा नहीं होता, तो विमान को डिस्मेंटल कर ट्रांसपोर्टर से वापस ले जाना पड़ेगा। इस बीच, भारत सरकार और वायुसेना ने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया, लेकिन यह मामला F-35B की तकनीकी सीमाओं और भरोसे को लेकर वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है।


निष्कर्ष

दुनिया का सबसे उन्नत समझे जाने वाला F-35B इस समय केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर एक तकनीकी पहेली बनकर खड़ा है। यह घटना दिखाती है कि चाहे तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, मानव त्रुटि या डिज़ाइन की खामियां किसी भी सिस्टम को संकट में डाल सकती हैं। भारत ने इस संकट को संयम और विशेषज्ञता से संभाल कर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय भरोसे को मजबूत किया है।


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