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स्पाइसजेट ने दिए सिर्फ बर्गर-फ्राइज, 14 घंटे तक परेशान रहा यात्री, उपभोक्ता आयोग ने ठोका जुर्माना

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Posted On:Tuesday, September 2, 2025

हवाई यात्रा के लिए जब कोई यात्री हजारों रुपये खर्च करता है, तो उसकी एकमात्र उम्मीद होती है – समय पर और सुविधाजनक सफर। लेकिन कई बार तकनीकी कारणों, मौसम या ऑपरेशनल कारणों से फ्लाइट में देरी हो जाती है। ऐसी स्थिति में एयरलाइंस की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे यात्रियों की हर आवश्यक सुविधा का ध्यान रखें — जैसे कि भोजन, ठहरने की व्यवस्था और लगातार अपडेट देना। लेकिन जब कंपनियां इससे बचती हैं, तो यात्री अधिकारों का उल्लंघन होता है।

हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें मुंबई जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पाइसजेट एयरलाइंस को यात्री के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ₹55,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला जुलाई 2023 का है। शिकायतकर्ता ने दुबई से मुंबई के लिए स्पाइसजेट की फ्लाइट बुक की थी। लेकिन इस फ्लाइट को करीब 14 घंटे की देरी के बाद उड़ान भरने की अनुमति मिली। इस दौरान यात्री और अन्य सहयात्रियों को केवल एक बर्गर और फ्राइज दिए गए। न तो सोने की कोई व्यवस्था की गई, न पानी, और न ही स्थिति की स्पष्ट जानकारी दी गई।

यात्री ने स्पाइसजेट के खिलाफ शिकायत दर्ज की और कहा कि डीजीसीए के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि फ्लाइट में देरी की स्थिति में एयरलाइंस को भोजन, पानी और ठहरने की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।


एयरलाइंस ने क्या कहा?

स्पाइसजेट ने आयोग के सामने तर्क दिया कि देरी तकनीकी और ऑपरेशनल कारणों से हुई थी, जो उनके नियंत्रण से बाहर थे। एयरलाइन ने यह भी दावा किया कि डीजीसीए के नियमों के अनुसार, तकनीकी खराबी को "असाधारण परिस्थितियों" में गिना जाता है और इसलिए यह सेवा में कमी नहीं मानी जा सकती।


आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने स्पाइसजेट के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एयरलाइंस किसी भी परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। तकनीकी खराबी कोई ऐसा बहाना नहीं है जिससे एयरलाइंस यात्रियों की देखभाल से मुंह मोड़ सकें। 14 घंटे की देरी के दौरान यात्रियों को सिर्फ एक बार हल्का भोजन देना सेवा में गंभीर कमी को दर्शाता है।

हालांकि यात्री ने ₹4 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी, जिसे आयोग ने अत्यधिक मानते हुए खारिज कर दिया, लेकिन यात्री की मानसिक पीड़ा, असुविधा और अपमानजनक अनुभव के लिए ₹55,000 का मुआवजा तय किया गया।


उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश?

यह फैसला न सिर्फ एयरलाइंस के लिए चेतावनी है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी एक सशक्त संदेश है कि वे अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रहें। यदि यात्रा के दौरान आपके साथ अन्याय होता है या नियमों का उल्लंघन होता है, तो आप उपभोक्ता फोरम में न्याय की मांग कर सकते हैं


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