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SC के जजों की संपत्ति सार्वजनिक, जानें CJI संजीव खन्ना की नेट वर्थ?

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Posted On:Tuesday, May 6, 2025

भारतीय न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने सभी न्यायाधीशों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय को पारदर्शिता की दिशा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले चरण में 21 न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण अपलोड कर दिया गया है। इनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना की संपत्ति का ब्योरा भी शामिल है।

CJI संजीव खन्ना की संपत्ति: बचत और निवेश पर फोकस

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के नाम पर उपलब्ध संपत्ति का विवरण दिखाता है कि उनकी अधिकांश संपत्ति बचत और निवेश में है। न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, उनके पास 55 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और एक करोड़ रुपये का पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) है। इसके अलावा, उन्होंने अचल संपत्तियों में भी निवेश किया है।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, CJI खन्ना के पास दिल्ली में दो फ्लैट, एक कॉमनवेल्थ विलेज में 4 बेडरूम वाला फ्लैट और दूसरा 2 बेडरूम का फ्लैट है। साथ ही, गुरुग्राम में एक फ्लैट उन्होंने अपनी बेटी के साथ मिलकर खरीदा है। उनका मूल निवास हिमाचल प्रदेश में है, जहाँ पर उनकी पैतृक संपत्ति भी स्थित है।

न्यायपालिका में पारदर्शिता की पहल

सुप्रीम कोर्ट ने इस पहल की शुरुआत 1 अप्रैल 2025 को की थी, जब यह निर्णय लिया गया कि सभी न्यायाधीश स्वैच्छिक रूप से अपनी संपत्ति की जानकारी साझा करेंगे। यह निर्णय लंबे समय से उठ रही पारदर्शिता की मांगों के उत्तर में लिया गया है। भारत की न्यायपालिका पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि वहाँ पारदर्शिता का अभाव है। लेकिन इस पहल से न्यायपालिका के प्रति आम नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लोकतंत्र की नींव को मजबूत करेगा, क्योंकि जब जनता यह जान सकेगी कि न्यायाधीश किस प्रकार की आर्थिक स्थिति में हैं, तो वह न्यायिक फैसलों पर अधिक भरोसा कर सकेगी।

स्वैच्छिक प्रकटीकरण का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जानकारी स्वैच्छिक रूप से दी गई है। इसका मतलब यह है कि न्यायाधीशों को बाध्य नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं पहल करते हुए अपनी संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक किया। इससे यह भी सिद्ध होता है कि न्यायिक प्रणाली के भीतर पारदर्शिता की भावना स्वयं विकसित हो रही है।

भारत के न्यायिक इतिहास में नई मिसाल

मुख्य न्यायाधीश द्वारा इस पहल में अग्रणी भूमिका निभाना भी उल्लेखनीय है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, जिन्होंने 11 नवंबर 2024 को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी, इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपनी न्यायिक सेवाएं दे चुके हैं। वे न्यायिक ईमानदारी और निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं।

उनकी यह पहल न केवल व्यक्तिगत स्तर पर पारदर्शिता का प्रतीक है, बल्कि समूची न्यायपालिका के लिए एक मार्गदर्शक भी है। यह पहला मौका नहीं है जब न्यायपालिका की पारदर्शिता पर सवाल उठे हों, लेकिन यह जरूर पहला बड़ा कदम है जिसमें शीर्ष स्तर पर पहल करते हुए संपत्ति का खुलासा किया गया है।

जनता का विश्वास और लोकतंत्र की मजबूती

एक लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके तीनों स्तंभ – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका – कितने पारदर्शी और जवाबदेह हैं। जहां विधायिका और कार्यपालिका के सदस्यों की संपत्ति का ब्योरा समय-समय पर सामने आता है, वहीं न्यायपालिका को लेकर यह अपेक्षा अब तक अधूरी थी।

यह पहल दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट भी अब खुद को एक खुले, पारदर्शी और उत्तरदायी संस्थान के रूप में प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। इससे आम नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा कि देश की सबसे बड़ी अदालत में बैठे लोग भी उसी तरह जवाबदेह हैं जैसे अन्य सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने न्यायाधीशों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करना न केवल एक ऐतिहासिक फैसला है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता को मजबूत करने वाला कदम भी है। यह न्यायपालिका में जनता के विश्वास को और गहरा करेगा, साथ ही अन्य संवैधानिक संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में हाई कोर्ट और अन्य न्यायिक निकाय भी इसी राह पर चलते हैं या नहीं। लेकिन इतना तय है कि मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ी मिसाल पेश की है


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