ताजा खबर
कांग्रेस की रैली में 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' की गूंज, मणिशंकर अय्यर मूवमेंट की यादें हुईं ताजा   ||    मुझे दलील रखने दें... सॉलिसिटर जनरल देते रहे दलील, CJI सूर्यकांत बोले- हम अंतरिम जमानत देते हैं, सिब...   ||    AUS vs ENG: भारत के खिलाफ फेंकी थी 1 ओवर में 9 गेंद, लगाई थी वाइड की लाइन, उसके दम पर एडिलेड टेस्ट ज...   ||    On This Day in 1979: जब पिच पर एल्युमीनियम बैट ने बंद करा दिया टेस्ट मैच, बदलने पड़ गए क्रिकेट के नि...   ||    BCCI का भारतीय टीम के लिए नया फरमान, प्लेयर्स को अल्टीमेटम! किसी भी कीमत पर खेलने होंगे ये 2 मैच   ||    इंग्लैंड ने चली चाल, एशेज में वापसी करने के लिए प्लेइंग XI में बड़ा बदलाव, जोश टंग की एंट्री   ||    चाहे जितना फ्लॉप हो टी20 टीम में इन 2 खिलाड़ियों की जगह है पक्की, आखिर क्यों प्लेइंग XI से बाहर नहीं...   ||    आज से अमेरिका लेगा भारतीयों के खिलाफ एक्शन? H-1B और H-4 वीजा के लिए छोड़नी पड़ेगी प्राइवेसी   ||    'मेरा बेटा बहुत...', सिडनी में हमला करने वाले आतंकी की मां का आया बयान, गोलीबारी पर जानें क्या कहा   ||    ब्रिटेन से निकाले जाएंगे लाखों मुसलमान! भारत पर सबसे ज्यादा असर कैसे?   ||   

रॉकस्टार के 14 साल: एक आवाज़ जो अब भी दिलों में गूंजती है

Photo Source :

Posted On:Tuesday, November 11, 2025

कभी-कभी कोई फिल्म सिर्फ कहानी नहीं होती, वो एक एहसास बन जाती है — और रॉकस्टार ऐसी ही एक फिल्म थी। चौदह साल पहले जबजनार्दन जाखड़ उर्फ़ जॉर्डन ने गिटार हाथ में लिया था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि उसकी आवाज़ आने वाले सालों तक पीढ़ियों की नब्ज़बन जाएगी। रॉकस्टार सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि प्यार, पीड़ा और पहचान की तलाश का वो सफ़र था, जिसने हर संवेदनशील दिल को छू लिया।

रणबीर कपूर का जॉर्डन आज भी उतना ही जीवंत लगता है — एक कलाकार जो अपनी मोहब्बत और टूटन के बीच सच्चे संगीत की खोज में भटकतारहा। इम्तियाज़ अली ने इस किरदार के ज़रिए दिखाया कि कला का असली जन्म दर्द से होता है। वहीं ए.आर. रहमान का संगीत इस फिल्म की आत्माबन गया। साड्डा हक ने विद्रोह को आवाज़ दी, नादान परिंदे ने खोएपन को अर्थ दिया, और तुम हो ने मोहब्बत को सुकून। ये वो धुनें हैं जो वक्त के साथ पुरानी नहीं होतीं — बस और गहरी लगने लगती हैं।

रॉकस्टार ने भारतीय सिनेमा को एक नया चेहरा दिया — ऐसा चेहरा जो चमक से नहीं, सच्चाई से परिभाषित हुआ। इसकी कहानी किसी हीरो की जीतकी नहीं, बल्कि उसकी हार में छिपे सौंदर्य की थी। फिल्म के संवाद, कैमरा वर्क और भावनात्मक ईमानदारी ने दर्शकों को बार-बार लौटकर आने परमजबूर किया। यही वजह है कि आज भी जब कहीं “साड्डा हक” बजता है, तो उसके साथ सिर्फ संगीत नहीं, एक पूरा दौर लौट आता है।

चौदह साल बाद रॉकस्टार हमें याद दिलाती है कि सच्चा कला रूप कभी बूढ़ा नहीं होता। यह फिल्म उस पीढ़ी की गवाही है जिसने सीखा कि टूटना भीएक तरह की आज़ादी है, और संगीत — चाहे वो गिटार की धुन हो या दिल की धड़कन — हमेशा हमें जोड़ने का ज़रिया बनता है। शायद यही वजह हैकि रॉकस्टार आज भी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक अधूरी मोहब्बत की अमर गूंज है।

Check Out The Post:-


भागलपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. bhagalpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.