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ED की जांच तेज: अनिल अंबानी 14 नवंबर को पेश नहीं हुए, अब 17 नवंबर को तलब

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Posted On:Friday, November 14, 2025

मुंबई, 14 नवम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक संवेदनशील मामले में ED ने उन्हें 14 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि, निर्धारित तारीख पर अंबानी स्वयं उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से शामिल होने का अनुरोध किया था, लेकिन एजेंसी ने इसे स्वीकार नहीं किया। अब ED ने उन्हें 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए दूसरा समन जारी कर दिया है।

यह मामला 2010 के जयपुर-रींगस हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। इस प्रोजेक्ट का EPC कॉन्ट्रैक्ट रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को मिला था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े फंड में भारी अनियमितताएं हुईं और लगभग 40 करोड़ रुपए सूरत की कुछ शेल कंपनियों के माध्यम से दुबई भेजे गए। यह लेन-देन एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क से जुड़ा पाया गया, जिसकी राशि 600 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है।

ED ने यह भी दावा किया है कि इस हवाला नेटवर्क के जरिए फर्जी कंपनियों के सहारे बड़ी रकम विदेशों तक पहुंचाई गई। इसी जांच के तहत एजेंसी ने अब तक अंबानी और उनकी कंपनियों से जुड़ी कुल 7,500 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। इसमें नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) की 132 एकड़ जमीन शामिल है, जिसकी कीमत 4,400 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई। इसके अलावा अंबानी के पाली हिल स्थित घर समेत 40 से अधिक अचल संपत्तियों को भी अटैच किया गया है।

ED की जांच केवल हाईवे प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड डायवर्जन का खुलासा किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL को 2,965 करोड़ और RCFL को 2,045 करोड़ रुपए का लोन दिया था। लेकिन दिसंबर 2019 तक ये रकम NPA में बदल गई। ED का आरोप है कि इन फंड्स को ग्रुप की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया, जबकि कई फर्जी और कमजोर कंपनियों को बिना उचित वेरिफिकेशन के लोन दिया गया।

जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं—कई लोन ऐसे थे जिनके आवेदन, मंजूरी और डिस्बर्समेंट एक ही दिन में कर दिए गए। कई दस्तावेज अधूरे, ब्लैंक या डेटलेस पाए गए। ED ने इस प्रक्रिया को “इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर” बताया है। मामले में CBI भी सक्रिय है, जिसने यस बैंक द्वारा दिए गए दो बड़े लोन से जुड़े मामलों में FIR दर्ज की है।


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